हमारे बारे में
इतिहास
श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम जैन गुरुकुल (Jain Gurukul Ellora) एक प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान है जो छात्रों को परिवर्तनकारी शिक्षण अनुभव प्रदान करने के लिए समर्पित है। एक समृद्ध विरासत और समग्र शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, हम दशकों से युवा दिमाग को आकार दे रहे हैं।
इ.स.1918 में प. पु. समंतभद्र महाराजश्री के मंगल आशीर्वाद से कारंजा (लाड) जि. वाशिम मे ‘श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रम गुरुकुल की स्थापना हुई | इसी संस्था की शाखा के रूप मे प. पु. समंतभद्र महाराज एवं प. पु. आर्यनंदी महाराज की प्रेरणा से श्रुतपंचमी के मंगल अवसर पर 7 जून 1962 को श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्यआश्रम जैन गुरुकुल एलोरा (Jain Gurukul Ellora) जि. औरंगाबाद (महाराष्ट्र) की स्थापना हुई| उस अवसर पर श्री जयचंदजी लोहाडे, श्री तनसुखलालजी ठोले ,श्री पन्नालालजी गंगवाल, श्री हुकुमचंदजी ठोले, श्री वर्धमान जी पांडे इत्यादी महानुभावोंके नेतृत्व में संस्था का सफर अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितीयों मे प्रारंभ हुआ |इस गुरुकुल मे रहने वाले बच्चों की दिनचर्या प्राचीन गुरुकुल परंपरानुसार सुबह 4.5 बजे से लेकर रात 9.30-10 बजे तक निश्चित हुई| जिसमें सुबह ब्रम्हमुहूर्त मे उठना – शारीरिक कसरत- थंडे पानी से नहाना- अध्यात्मिक अध्ययन – स्वयं अनुशासन एवं स्वावलंबन की जीवनचर्या- उत्कृष्ट लौकिक शिक्षण की सुविधा – जैन परंपरा नुसार पूर्ण शाकाहारी अत्यंत सात्विक भोजन- इत्यादी बातों का समावेशं रहा | प. पु. महाराज द्वय की प्रेरणा और समर्पित कार्यकर्ताओं की समर्पण भावना से इस संस्था दिन दुनी- रात चौगुनी प्रगति की |
ई.स. 1962 मे ही गुरुकुल स्थापना के साथ साथ गुरुकुल एवं गाव तथा परिसर के बच्चों के लौकिक अध्ययन के लिए विद्यामंदिर एलोरा की स्थापना हुई | उच्च विद्या विभूषित अध्यापक वर्ग के उत्कृष्ट अध्यापन से इस विद्यालय का नाम परिसर में पुष्प की सुगंध की तरह फेल गया | विद्यार्थी संख्या बढ गई | तत्कालीन संस्था सचिव श्री पन्नालालजी गंगवाल उनके सुपुत्र तथा वर्तमान संस्था अध्यक्ष श्री दिनेशजी गंगवाल के बृहत योगदान से विद्यालय की नूतन वास्तू खडी हुई |गंगवाल परिवार की निस्पृहतासे विद्यामंदिर एलोरा का नामकरण गंगवाल विद्यालय की जगह गुरुदेव समंतभद्र विद्यामंदिर एलोरा – ऐसा हुआ |इस विद्यालय में स्व.श्री माणिकचंदजी हजारे, स्व. श्री देवकुमारजी कान्हेड ,श्री निर्मल कुमारजी ठोले इन्होने मुख्याध्यापक के रूप मे कार्य करते हुए विद्यालय एवं संस्था का नाम रोशन किया | वर्तमान मुख्याध्यापक श्री गुलाबचंदजी बोराळकर सरने 2006 से इसे और भी आगे बढाया | आज विद्यालय की ब्रहत वास्तू मे अद्यावत संगणक विभाग – ग्रंथालय- कलादालन -क्रीडा विभाग- इत्यादी विभाग उत्कृष्टतासे कार्यरत हैं |शासकीय- सामाजिक –सांस्कृतिक- सहशालेय- उपक्रमों से परिपूर्ण विद्यालय शाला समिती अध्यक्ष श्री मदनलालजी पांडे – सदस्य डॉ. प्रेमचंदजी पाटणी – एवं सुमितजी ठोले के नेतृत्व में सक्रिय रूप से कार्यरत है | 1250 लडके लडकिया कक्षा 5 से 10 तक सेमी इंग्लिश की सुविधा के साथ तथा टेक्निकल एज्युकेशन (कक्षा9,10) के साथ विद्यालय कार्यरत है|
संस्था (Jain Gurukul Ellora) की स्थापना प्रेम ज्ञान शील सेवा एवं व्यवस्था इस पंचसुत्री के मुख्य आधार पर हुई | इसमे लौकिक /अलौकिक अध्ययन अध्यापन संस्कार के साथ पूर्ण होता है |छात्र के कौशल्यपूर्ण विकास के लिये इ. स. 2010 में श्री दिनेशजी गंगवाल के मुख्य मार्गदर्शनमें एक जैन आय.टी.आय की स्थापना हुई |इसके अंतर्गत इलेक्ट्रिशियन (2वर्ग) ,फिटर(2वर्ग) ,कॉम्प्युटर (1वर्ग)ऐसे 3 ट्रेड 5 वर्ग चलते है |प्राचार्य श्री विजयजी रननवरे के प्रमुख नेतृत्व मे कार्यरत आयटीआय का स्टाफ अपनी मेहनत कल्पना शक्ती से विद्यार्थीयो मे कौशल्य निर्मिती कर रहे है | इस कमिटी मे श्री दिनेशजी गंगवाल (अध्यक्ष) एवं सदस्य के रूप में श्री शिरीषजी खंडारे, श्री मनोजजी काला ,श्री नितीनजी पाटणी के मार्गदर्शन में और अधिक ट्रेड बढाने की कोशिश हो रही है आय.टी.आय की स्वतंत्र वास्तु के साथ 100% छात्र को प्लेसमेंट मिल रही है| अपनी अनुठीकार्य शैली से इस आय.टी.आय ने अल्पावधी मे ही अपना नाम उत्कृष्ट आय.टी.आय मे दर्ज किया |
वर्तमान परिस्थितीनुसार संस्था मे एक अंग्रेजी माध्यम की pre primery & primary school भी कार्यरत है | इसके principal के रूप मे श्री विक्रांत करेवार कार्यरत है | इस विद्यालय काभी नाम परिसर में सन्मान से लिया जाता है |
इसके अलावा संस्था मे सन 1978 में श्री कांतीलालजी भुरे मुंबई के बृहत योगदान से निर्मित एक विशाल जिनमंदिर है | जिसमे मूलनायक के रूप में श्री पार्श्वनाथ की पद्मासन प्रतिमा हैं |इसकें उपर श्री पार्श्वनाथ की खडगासन प्रतिमा कांचमंदिर मे विराजमान है |इसमे प्रतिदिन गुरुकुल छात्र, एलोरा समाज ,एवं आनेवाले जैन यात्रियों को जिनदर्शन का लाभ मिलता है |साथ ही संस्था मे आने वाले जैन यात्रियों के लिए एक सुसज्ज नूतन अतिथी निवास Ac/Non Ac लगभग 50 कमरो की सुविधा से युक्त है |
संस्था के कार्यालय के अलावा जैन त्यागीवृतियो के लिये पुराने त्यागी निवास के साथ साथ एक नया जैन त्यागी निवास की वास्तु अपनी पूर्णता की और है | गुरुकुल छात्रों के लिए सर्व सुविधा युक्त आर्यनंदी छात्रावास शुद्ध एवं सात्विक भोजन के लिये श्री सुभाषसां केशरसा साहूजी भोजनालय, विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए एक विशाल आचार्य विद्यासागर सभागृह – तथा प्राचीन अर्वाचीन ग्रंथ तथा अनेक हस्तलिखितों से भरा हुआ आचार्य आर्यनंदी श्रुतभंडार विद्यमान है |इसके अलावा संस्था अंतर्गत एक गौशाला और हातकरघा भी कार्यरत है |
संस्था (Jain Gurukul Ellora) की अधिक जानकारी हेतू आप श्री प्रदीपजी जैन (राणू भैया) 8308766979 इस नंबर पर संपर्क कर सकते है | जैन समाज की दातृत्ववृत्ती से ही संस्था आज अपने चरमोत्कर्ष पर काम करने का प्रयास कर रही है | इसे कायम रखने के लिए आप सबके सहकार्य की अपेक्षा रखते है |
हमारा विशेष कार्य
नैतिक और दयालु व्यक्तियों का पोषण करना
जैन गुरुकुल एलोरा (Jain Gurukul Ellora) में, हमारा मिशन नैतिक और दयालु व्यक्तियों का पोषण करना है जो समाज में सकारात्मक योगदान देंगे। हम एक परिवर्तनकारी शैक्षिक अनुभव प्रदान करने के लिए समर्पित हैं जो शिक्षाविदों से परे है और चरित्र विकास पर केंद्रित है।
हमारा दर्शन
बेहतर समाज के लिए चरित्र विकास
हमारा दृढ़ विश्वास है कि चरित्र विकास ही बेहतर समाज की नींव है। हमारा शैक्षिक दर्शन हमारे छात्रों में सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को स्थापित करने के इर्द-गिर्द घूमता है। हमारा लक्ष्य उनके चरित्र को आकार देना, उन्हें नैतिक निर्णय लेने और सकारात्मक परिवर्तन का एजेंट बनने में सक्षम बनाना है।
हमारा दृष्टिकोण
शिक्षा को नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ना
हम कठोर शिक्षाविदों को नैतिक मूल्यों के साथ मिश्रित करके शिक्षा के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। हमारे अनुभवी और भावुक संकाय सदस्य बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने वाला एक समावेशी वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अपने पाठ्यक्रम के हर पहलू में नैतिक मूल्यों को एकीकृत करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारे छात्रों में एक मजबूत नैतिक दिशा-निर्देश और सामाजिक चेतना की गहरी भावना विकसित हो।
शैक्षणिक उत्कृष्टता को चरित्र विकास के साथ जोड़कर, हम अपने छात्रों को न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि जीवन में भी सफल होने के लिए आवश्यक कौशल, ज्ञान और मूल्यों से लैस करते हैं। जैन गुरुकुल एलोरा (Jain Gurukul Ellora) में हमसे जुड़ें और दयालु व्यक्तियों को आकार देने के हमारे मिशन का हिस्सा बनें जो दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
समयरेखा के साथ हमारा इतिहास
महाराष्ट्र के कारंजा में श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रम गुरुकुल की स्थापना 1918 में की गई थी, जिसमें नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर दिया गया था।
जैन धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली प्रदान करते हुए, महाराष्ट्र के एलोरा में श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम जैन गुरुकुल (Jain Gurukul Ellora) की स्थापना 7 जून 1962 में की गई थी।
1962 में स्थापित विद्यामंदिर एलोरा का उद्देश्य गुरुकुल और आसपास के गाँव में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रदान करना है।
2010 में, छात्रों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जैन आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की स्थापना की गई थी।
हमारी उपलब्धियां
- 1918 में परम पुज्य समंतभद्र महाराजश्री के आशीर्वाद से महाराष्ट्र के वाशिम जिले के कारंजा में श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रम गुरुकुल की स्थापना हुई।
- 7 जून 1962 को परम पुज्य समंतभद्र महाराज और परम पुज्य आर्यानंदी महाराज की प्रेरणा से महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के एलोरा में श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम जैन गुरुकुल (Jain Gurukul Ellora) की स्थापना हुई।
- 1962 में जैन गुरुकुल एलोरा (Jain Gurukul Ellora)की स्थापना के साथ-साथ गुरुकुल और आसपास के गाँव के बच्चों की धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के लिए विद्यामंदिर एलोरा की भी स्थापना की गई।
- विद्यालय ने श्री जयचंदजी लोहाडे, श्री तनसुखलालजी ठोले, श्री पंचलालजी गंगवाल, श्री हुकुमंदजी ठोले, श्री वर्धमानजी पांडे और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के नेतृत्व में प्रगति और विकास देखा।
- गंगवाल परिवार के योगदान के सम्मान में विद्यालय का नाम बदलकर गुरुदेव समंतभद्र विद्यामंदिर एलोरा कर दिया गया।
- वर्तमान में, श्री गुलाबचंदजी बोरालकर विद्यालय के प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत हैं और 2006 से इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
- 2010 में, श्री दिनेशजी गंगवाल के मार्गदर्शन में, छात्रों के कौशल विकास की सुविधा के लिए जैन आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की स्थापना की गई थी। यह इलेक्ट्रिकल, फिटिंग और कंप्यूटर ट्रेड में पाठ्यक्रम प्रदान करता है।
- श्री विजयजी रणनवरे के नेतृत्व में आईटीआई स्टाफ, छात्रों के कौशल को बढ़ाने और 100% प्लेसमेंट प्राप्त करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
- आईटीआई के अलावा, विद्यालय में कंप्यूटर, पुस्तकालय, खेल आदि विभाग भी हैं, जो छात्रों के समग्र विकास में योगदान देते हैं।
- विद्यालय में एक सक्रिय स्कूल प्रबंधन समिति है, जिसके अध्यक्ष श्री मदनलालजी पांडे हैं, जिसमें डॉ. प्रेमचंदजी पाटनी और सुमिताजी ठोले सदस्य हैं।
- वर्तमान में, विद्यालय कक्षा 5 से 10 तक के 1250 छात्रों को सेवा प्रदान करता है, उन्हें सेमी-अंग्रेजी शिक्षा और तकनीकी शिक्षा (कक्षा 9 और 10) की सुविधा प्रदान करता है।
- जैन आईटीआई ने अपने अनूठे दृष्टिकोण के लिए कम समय में ही पहचान हासिल कर ली है और उत्कृष्ट आईटीआई में अपना नाम स्थापित कर लिया है।
- समिति, श्री दिनेशजी गंगवाल (अध्यक्ष) और सदस्यों श्री शिरीषजी खंडारे, श्री मनोजजी काला और श्री नितिनजी पाटनी के मार्गदर्शन में, आईटीआई में और अधिक ट्रेड शुरू करने और इसकी पेशकश को और बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
सशक्त समुदाय
श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम जैन गुरुकुल (Jain Gurukul Ellora) में, हमारे पास समुदाय की एक मजबूत भावना है। हम एक सहायक और समावेशी वातावरण को बढ़ावा देने में विश्वास करते हैं जहां छात्र, शिक्षक और माता-पिता साझेदारी में मिलकर काम करते हैं। हम सभी हितधारकों के बीच बंधन को मजबूत करने और एक जीवंत समुदाय बनाने के लिए नियमित अभिभावक-शिक्षक बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित करते हैं।
अत्याधुनिक सुविधाएं
हमारा परिसर प्रभावी शिक्षण और समग्र विकास की सुविधा के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। हमारे पास अच्छी तरह से सुसज्जित कक्षाएँ, एक पुस्तकालय, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ और पाठ्येतर गतिविधियों के लिए एक समर्पित स्थान है। हम एक अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं जो छात्रों के बीच जिज्ञासा, रचनात्मकता और सहयोग को बढ़ावा देता है।